मृत्युभोज का हो पूर्णतः जन सहमति से बहिष्कार। जागों लोगों अब जागी सरकार

#मृत्युभोज/मौसर/ऐडो
नाम लेते ही एक ऐसा दृश्य आँखों के सामने आ जाता है जिसमें एक ऐसा घर जिसने अपना एक महत्वपूर्ण सदस्य खोया है। परिजन उसके गम रूदन क्रुदन कर रहे है। दूसरी तरफ कुछ लोग भीड़ के रूप में आ रहे है और दो मिनट का मसांणिया बैराग वाला शौक परिवार के सदस्यों से प्रकट करके वहां लगे एक बड़े से टेंट जो कि पहले से ही लबालब भरा है में घुस जाते है। फिर शुरू होता है एक बड़े से घेरे में 10-15 लोगों का एक साथ बैठ कर दावत का दौर! खुब खिलखिलाकर डट के हलवा पूरी का भोग लगाया जाता है। यह भुलकर कि जहां वो भोजन कर रहे है वहां पर एक मनुष्य की मौत हो रखी है पर किसे फर्क पड़ता है घर वाले को तो लोकलाज और परिवार व गांव वालों के दबाब में यह सब करना पड़ता है पर खाने वाले की क्या मजबूरी है पता नहीं क्या कोई व्यक्ति मृत्यु भोज नहीं खाने पर जीवित नहीं रह सकता जरूर रह सकता है मुझे  मृत्यू भोज छोड़े हुऐ लगभग 20 साल हो गये यानी 17 साल की उम्र में ही छोड़ दिया था और घर में लगभग सभी सदस्यों ने छोड़ रखा है और कभी कोई दिक्कत भी नहीं हुई कई बार रिश्तेदारी में औसर में जाना भी पड़ता है। बैठक में बैठ कर आ जाते है कभी कोई दिक्कत नहीं हुई! इस तरह सब लोग व्यक्तिगत्त रूप से ही इसका त्याग कर दे तो यह कम हो सकता है। कुछ लोगों को पता नहीं क्या समस्या है इस कोरोना जैसी महामारी में भी लुक छिप कर मृत्यु भोज किया और लोगों ने छक कर खाया। तो क्या जिन्दा मनुष्यों की जान से ज्यादा जरूरी है मृत्यु भोज!? इस प्रकार यह कुरीति  हमारे समाज में अपनी जड़े गहरी कर चुकी है। इसे जड़ से उखाड़ने का समय आ गया है। इसको बंद करने के लिए बुजुर्गों के सानिध्य में युवाओं को आगे आ करके पहल करनी चाहिए। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा को अगर रत्न बांटने से फुर्सत हो तो समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन पर भी थोड़ा ध्यान देना चाहिए। इस कुरुति उन्मूलन के काम को अभियान बनाने के लिए कितने युवा तैयार है! अपनी सहमति दे।
मृत्युभोज का हो पूर्णतः जन सहमति से बहिष्कार।  जागों लोगों अब जागी सरकार
मृत्युभोज का हो पूर्णतः जन सहमति से बहिष्कार।  जागों लोगों अब जागी सरकार

अब तो राजस्थान सरकार ने भी सकारात्मक पहल कर दी है। इस दिशा में मेरा मुख्यमंत्री महोदय से निवेदन है कि इस की जिम्मेदारी सरपंच, पंच, पटवारी के अलावा ग्रामसेवक, बीएलओ और स्कूल के पुरे स्टाफ व चिकित्सा कर्मियों को भी दे दी जाए तथा दी गई सूचना पर त्वरित कार्यवाही और आम आदमी द्वारा दी गई सूचना पूर्ण रूपेण गुप्त रहे ऐसी भी सख्त व्यवस्था हो।

रामनिवास बिश्नोई
जेगला,नोखा ,बीकानेर



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