भोजासर ग्राम के बिशनोई समाज ने सामाजिक कुरुतियों पर पाबंदी लगाकर मिशाल पेश की।

 भोजासर ग्राम के बिशनोई समाज ने सामाजिक कुरुतियों पर पाबंदी लगाकर मिशाल पेश की। 
  बिशनोई समाज में कुरुतियों ने जड़े जमा ली है। उनमें सुधार कैसे किया जाए वो  बिंदु वार  इस प्रकार है:
भोजासर ग्राम के बिशनोई समाज ने सामाजिक कुरुतियों पर पाबंदी लगाकर मिशाल पेश की।

 
1. किसी व्यक्ति के देवलोक होने पर मिट्टी( अंतिम संस्कार) में बहन- बेटी के अलावा अनावश्यक  सगे- संबंधीयो को इस अवसर पर नहीं बुलाया जाए क्योंकि
(अ.) यह परंपरा हाल के वर्षों में शुरू हुई है
(ब.) इससे हमारी बहन बेटी व रिश्तेदारों को कम से कम चार से पांच बार आने जाने के कारण अपने ही रिश्तेदारों पर आर्थिक भार पड़ता है जैसी मिट्टी पर आना ,होम  के दिन आना , बही मे आना ,सोमवार को आना ,उठावणे  में आना और फिर त्योहार पर आना आदि  इससे प्रत्येक रिश्तेदार व बहन बेटी पर 10000से 15000 खर्च पड़ता है ।

2.  हवन से पहले भोजन नहीं बनाना चाहिये
(अ.)  अक्सर देखा गया है कि अंतिम संस्कार के बाद लोग होम होने से पहले  सूतक - पातक में ही उसी घर के अंदर  पहले भोजन करते हैं| यह मानवीय संवेदना की दृष्टि से उचित नहीं है इसलिए इस पर भी अमल किया गया।
(ब.) होम होने के बाद ही  तीसरे दिन का खाना बनाया जाना चाहिए।

3. होम के दिन का भोजन पर चर्चा :-  होम के दिन खाने के अंदर गेहूं के आटे का हलवा चना, दाल -रोटी सुविधानुसार बनाएं जिसमें कुटुम के 20 से 30 घर व शोक संवेदना प्रकट करने आने वाले रिश्तेदारों की मनवार हो सके उतना ही खाना होना चाहिए साथ ही गांव के लोग संवेदना प्रकट करने आते हैं वह भी भोजन कर सकते हैं।

4.  पोतिया - पागड़ी दादा के परिवार तक ही सीमित की जाए। 

5.  बैठक उठाई की सूचना व कार्यक्रम
(अ.) समय की मांग के अनुसार   बैठक अधिकतम 12 या 15 दिन ही रखी जाए।
इसकी  सूचना सोशल मीडिया और अन्य माध्यम से दी जाए। 
बिना जागरण ही बैठक उठाई जाएगी इस बैठक में परिवार के लोग ही शामिल होवें। 

6. सगियों को तीवल
(अ.) आज के समय में देखा गया है कि मौसर के अवसर पर सगीयो को तीवल  करने का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा है। जिससे बहुत बड़ा आर्थिक भार बढ़ गया है। इस को रोकना अति आवश्यक है। भोजासर के निवासी न ही सगियों से तीवल लेंगे और ना ही सगीयो  को तिवल पहनायी जायेगी। इस पर  अमल किया जाएगा ।

7. मृत्युभोज के  बाद सोमवार की प्रथा
यह प्रथा अभी शुरू हुई। इससे धन,समय की बरबादी होती है।यह प्रथा केवल नशा प्रवृति को बढ़ावा देती हैं। इसको बंद किया जाना चाहिए।
(अ).  नशा प्रवृत्ति पर पूर्ण रोक थाम -   किसी भी सामाजिक, पारिवारिक कार्यक्रमो  पर जैसे  मौसर,विवाह, सभा, जागरण, चुलू, पाहाल, अफीम, डोडा,चाय पूर्ण रुप से बंद रखने पर सहमति प्रदान की  ।

8.मायरा व सीख में तीवल पर विचार :- 
मायरा और सीख में बहन बेटी को सीख में अपने परिवार के अलावा रुपए देने की परंपरा डाली जाएं ताकि वो अनपी आवश्यकता अनुसार उपयोग ले सके।क्यूंकि लेने देने वाली तिवल अमूमन पहनने योग्य नहीं होती। इससे धन का अपव्यय होता है।
इसके अलावा आप सभी से गहन विचार मंथन के बाद इन बिंदुओं को कम या ज्यादा किया जाएगा।नए सुझावों को शामिल कर विस्तार  करेंगे। प्रत्येक आम खास इस आयोजन मे पूर्ण भागीदारी निभाएं।

यह सामाजिक सुधार अभियान पूर्ण रूप से निष्पक्ष,गैर राजनीतिक और नेक इरादे से शुरू किया गया है। इस चर्चा में भाग लेने वाले सब बराबर है,सब की अहमियत है और जो भी निर्णय होगा राजा-रंक सब के लिए बराबर लागू होगा।
   
                   
                मीटिंग में सेवानिवृत्त प्रिंसीपल शैतान सिंह  सारण अध्यक्ष, गुरु जम्भेश्वर मन्दिर कमेटी,  जाम्भा महन्त भगवान दास, स्वामी भागीरथदास आचार्य जैसला, राजाराम व्यख्याता , श्री पूनमचंद सारण पुर्व सरपंच ,श्री रुपाराम कालीराणा  सचिव अखिल भारतीय बिशनोई महासभा  एंव आम विश्नोई समाज भोजासर ने भाग लेकर कर आम सहमति से उपरोक्त विषय पर अपनी सहमति जताई। 

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