बिश्नोई मंदिर हिसार में श्री गुरू जंभेश्वर भगवान का 570वां जन्मोत्सव मनाया गया - Bishnoism

 बिश्नोई मंदिर हिसार में श्री गुरू जंभेश्वर भगवान का 570वां जन्मोत्सव मनाया गया

बिश्नोई मंदिर हिसार में श्री गुरू जंभेश्वर भगवान का 570वां जन्मोत्सव मनाया गया

बिश्नोई मंदिर हिसार में श्री गुरू जंभेश्वर भगवान का 570वां जन्मोत्सव मनाया गया


श्री गुरू जंभेश्वर भगवान के 570वें जन्मोत्सव व जन्माष्टमी महोत्सव पर स्थानीय बिश्नोई मंदिर में आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए विधायक कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि अगर हम अपने जीवन की आपाधापी छोड़कर श्री कृष्ण जी एवं गुरू महाराज के जीवन दर्शन पर चंद कदम भी चलें तो हम जीवन में संपूर्णता पा सकते हैं, शांति पा सकते हैं और तनाव रहित आदर्श जीवन जी सकते हैं। श्रीकृष्ण जी एवं जाम्भोजी दोनों मनुष्य के चरित्र विकास पर बल देते हैं, जिससे मनुष्य हमेशा प्रसन्न रह सके। श्री कृष्ण जी जहां व्यक्ति को संघर्ष करने व हक के लिए लडऩे की पे्ररणा से भर देते हैं, वहीं गुरू जंभेश्वर महाराज व्यक्ति को अच्छे कर्म करके जीवन को इतना श्रेष्ठ बनाने पर बल देते हैं कि आपका व्यक्तित्व अनुकरणीय हो जाए। श्रीकृष्ण जी एवं जांभो जी महाराज के दिखाए आदर्शों का मूल भाव एक ही रहता है कि मनुष्यता का विकास किया जाए व धर्म को मनुष्य के जीवन के आचरण में ढाला जाए, इसीलिए जाम्भो जी महाराज अपनी शब्द वाणी में बार-बार श्री कृष्ण चरित्र को जीवन में उतारने पर बल देते हैं, जिससे जीवन अपनी संपूर्णता को पा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता फतेहाबाद के विधायक दुड़ाराम ने की।  उन्होंने कहा कि गुरू जंभेश्वर भगवान ने 29 नियमों की आचार संहिता सभी के लिए मानवता की भलाई के लिए दी थी। इस दौरान बिश्नोई सभा हिसार, बिश्नोई सभा मंडी आदमपुर, फतेहाबाद, रतिया, टोहाना, मंडी डबवाली, भिवानी, कुरूक्षेत्र, पंचकूला, दिल्ली सभा सहित कर्मचारी कल्याणी समिति, सेवक दल, युवा संगठन के प्रधान एवं अन्य पदाधिकारियों ने कुलदीप बिश्नोई को बिश्नोई रत्न मिलने पर उन्हें पगडिय़ों, शॉल, स्मृति चिन्ह देकर उनका स्वागत किया।

कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि आज पूरी दुनिया में पर्यावरण को बचाने के लिए बहस छीड़ी हुई है, जबकि हमारे इतिहास पर अगर दुनिया नजर दौड़ाए तो साफ हो जाता है कि सदियों से बिश्नोई समाज जीवों व पर्यावरण का महत्व समझता आ रहा है। उस दौर में पेड़ों के प्रति हमारे समाज का लगाव इतना अधिक था जो मानते थे कि सिर सांचे रूंख रहे तो भी सस्ता जाणियो यानि सिर कटने से पेड़ बचता है तो भी सस्ता मानो। अमृता देवी सहित 363 नर नारियों के महान बलिदान को हमारा समाज तो क्या दुनिया में जो भी सुनेगा उसे कभी भूला नहीं पाएगा। आज युवाओं में नशाखोरी जैसी बुराईयां बढ़ती जा रही हैं, जो कि चिंता का विषय है। हमारा समाज और इतिहास तो अन्य धर्मों और समाजों के लिए पे्ररणा है। ऐसे में अगर हम अपनी परंपराओं को जिंदा नहीं रखेंगे तो गुरू जंभेश्वर भगवान द्वारा बनाए गए बिश्नोई समाज की महत्ता कम होती जाएगी। स्व. जननायक चौधरी भजनलाल जी का ताउम्र प्रयास रहा कि बिश्नोई समाज के उत्थान में जितनी भी आहुति डाली जाए वो कम है। जब-जब आपने मुझे ताकत दी तो मैंने भी भरसक प्रयास किया कि बिश्नोई समाज की प्रतिष्ठा पर कभी आंच न आने पाए। चाहे मुझे कोई भी लड़ाई क्यों न लडऩी पड़ी हो। मैंने हमेशा समाज को राजनीति से ऊपर रखा है।  कोई भी समाज तभी सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक रूप से सुदृढ़ हो पाता है जब व एकता के सूत्र में बंधा रहे। इतिहास गवाह है जब भी कोई समाज निजी स्वार्थों के वशीभूत होकर अलग-अलग दिशाओं में भटका तो बहुत ही कम समय में उसका पतन हुआ। चाहे व आर्थिक रूप से हो, सामाजिक रूप से हो या राजनीतिक रूप से हो। आज पूरे देश में बिश्नोई समाज उन्नति के पथ पर अग्रसर है तो वह इसलिए की गुरू जंभेश्वर भगवान के दिशाए आदर्शों पर चलकर हमारे पूर्वजों ने हमारे समाज के संतों व नेताओं की बातें न केवल सुनी, बल्कि उन पर अमल करते हुए एक ही दिशा में चलकर उनका साथ दिया। राजनीति की ही अगर बात करूं तो जननायक बिश्नोई स्व. चौधरी भजनलाल का ही उदाहरण ले लीजिए, जिन्होंने बिश्नोई समाज को राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक पहचान दिलाई, क्योंकि समाज ने भी एक माला की तरह एकजुट होकर उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में लंबे लॉकडाउन, घटते रोजगार, ठप होते काम धंधों ने हमें यह सबक दिया है कि मनुष्य की प्राथमिकताएं क्या हैं? किसी देश, दुनिया या समाज पर कोई बड़ी आपदा आती है तो सिर्फ एक चीज ही उसे बचाती है और वो है एकजुटता। कोरोना के दौर ने हमें सिखाया है कि एकजुट रहकर ही जीवन में आने वाली बड़ी-बड़ी मुसीबतों का मुकाबला किया जा सकता है।  आज अगर राष्ट्रीय स्तर पर बिश्नोई समाज की एक अलग और सकारात्मक पहचान है तो इसके लिए बिश्नोई समाज की एकजुटता ही सबसे बड़ा कारण है। जब-जब समाज पर कोई संकट आता है तो हम सब एक मुठ्ठी की तरह एकजुट हो जाते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसी ताकत की बदौलत जननायक स्व. चौ. भजनलाल देश की राजनीति में गहरी छाप छोड़ पाए थे। उन्होंने कहा कि समाज ने मुझे 'बिश्नोई रत्न' का सम्मान दिया, जो मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। इसके लिए मैं समस्त समाज और संपूर्ण अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा का दिल की गहराईयों से आभार व्यक्त करता हूँ। आप सबने जो सम्मान और स्वागत किया है उसके लिए आप सभी महानुभावों का कोटि-कोटि धन्यवाद करता हूँ। इस दौरान मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद, स्वामी सच्चीदानंद, पूर्व सांसद रामजीलाल, पूर्व विधायक जसमा देवी आदि उपस्थित थे।


रिपोर्ट: The Bishnois



Post a Comment

0 Comments