गुरु पूर्णिमा - स्वामी सचिदानन्द जी आचार्य

गुरू गुरू गेवर गरवा शीतल नीरूं,मेवा ही अति मेउू!
चढ़कर बोहिता भवजल पार लगावे,सो गुरू खेवट खेवा खेहूं!!
गुरू का व्यक्तित्व हिमालय सा उच्च,जल सा शीतल ,मेवों सा मधुर जीवन व जीव की नैया के खेवनहार बनकर जीवन के साथ भी और बाद भी सदैव सम्हालते है। गेवर गरवा शीतल नीरूं,मेवा ही अति मेउू!
चढ़कर बोहिता भवजल पार लगावे,सो गुरू खेवट खेवा खेहूं!!
स्वामी सचिदानन्द जी आचार्य
स्वामी सचिदानन्द जी आचार्य 

गुरू का व्यक्तित्व हिमालय सा उच्च,जल सा शीतल ,मेवों सा मधुर जीवन व जीव की नैया के खेवनहार बनकर जीवन के साथ भी और बाद भी सदैव सम्हालते है। 
माँ बच्चे की भूख पहचान लेती है, इसीलिए भोजन की थाली तुरंत ले आती है और भविष्य में बच्चे को हमेशा भरी थाली मिलती रहे, पिता इसका इंतजाम करता है। माता-पिता का महत्त्व, जीवन का मर्म और लौकिकता से अलौकिकता तक का मार्ग समझाने का कार्य गुरु द्वारा किया जाता है।
(Mother recognizes the child's appetite, that's why she brings the food plate immediately and in the future the child keeps on getting a full plate, the father ensures an arrangement for it. The work of explaining the importance of parents, the secret of life and the path from earthly to spiritualism is done by...
सभी गुरू भक्तों को गुरू पूर्णिमा की अशेष शुभकामनाएँ..!





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