हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर जाम्भाणी साहित्य- प्रो करूणा शंकर उपाध्याय

हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर जाम्भाणी साहित्य- प्रो करूणा शंकर उपाध्याय

हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण धरोहर जाम्भाणी साहित्य- प्रो करूणा शंकर उपाध्याय

बीकानेर। आज दिनांक 29 जून जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर और मुम्बई विश्वविद्यालय मुम्बई के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आरंभ हुआ । 
        उद्घाटन सत्र अध्यक्षता कर रहे प्रो राजेश खरात ने मध्यकालीन साहित्य एवं जाम्भाणी साहित्य परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला । आचार्य सच्चिदानंद जी लालासर ने हुजूरी जाम्भाणी साखी का गायन कर वेबिनार का शुभारंभ किया । आशीर्वचन अकादमी अध्यक्ष आचार्य कृष्णानंद जी ऋषिकेश एवं स्वागत भाषण मुम्बई विश्विद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो करुणाशंकर उपाध्याय ने दिया । उद्घाटन सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के निदेशक नंदकिशोर पांडेय ने गुरु जाम्भोजी एवं उनके विचारों पर अनेक नए आयामो पर विचार रखे । प्रो पांडेय ने गुरु जाम्भोजी प्रणीत 29 नियमो की विस्तार से व्याख्या की ।
      विशिष्ट वक्ता के रूप में पोलैंड के वर्सा विश्वविद्यालय से प्रो सुधांशु शुक्ला ने महत्वपूर्ण विचार रखते हुए बताया कि किस प्रकार वर्तमान वैश्विक महामारी के समय गुरु जाम्भोजी की वाणी हमे बचाव के उपाय बता रही है ।
      प्रो केसरीमल वर्मा कुलपति रायपुर विश्वविद्यालय ने गुरु जाम्भोजी के सिद्धांतों में जीवन की विधि को बताते हुए किस प्रकार जिया ने जुगति अर मुवा ने मुक्ति प्राप्त की जा सकती है ।
 धन्यवाद ज्ञापन देते हुए अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो बनवारीलाल साहू ने मध्यकालीन साहित्य के महत्व और जाम्भाणी साहित्य के जन जन तक प्रचार प्रसार का संकल्प दोहराया । सत्र का सफलतापूर्वक संचालन डॉ सुरेंद्र कुमार बिश्नोई हिसार ने किया वहीं तकनीकी संयोजन डॉ लालचंद बिश्नोई और सह संयोजन डॉ मनमोहन लटियाल ने किया । उद्घाटन सत्र के अतिथियों ने डॉ रामस्वरूप बिश्नोई और डॉ पुष्पा बिश्नोई द्वारा तैयार स्मारिका का विवेचन किया । उद्घाटन सत्र के तुरंत बाद प्रथम तकनीकी सत्र प्रारम्भ हुआ ।
        प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता बीकानेर के वयोवृद्ध साहित्यकार डॉ मदन केवलिया ने की । इस सत्र के विशिष्ट वक्त प्रो पूरणचंद टंडन दिल्ली विश्वविद्यालय ने भक्ति की परंपरा पर बहुत ही विस्तार से प्रकाश डाला तथा संत साहित्य की आवश्यकता पर बल देते हुए कोई ऐसा संस्थान बनाया जाए जहां इसका अध्ययन और शोध हो सके । इस सत्र के विशिष्ट वक्ता प्रो आनंद पाटिल तमिलनाडु विश्वविद्यालय, प्रो बाबूराम चो बंशीलाल विश्वविद्यालय भिवानी ने पाठालोचन और मध्यकालीन पठालोचकों पर विस्तार से प्रकाश डाला, प्रो शैलेंद्र शर्मा विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन ने मध्यकालीन साहित्य के महत्व और पुनर्पाठ की आवश्यकता पर बल दिया तथा जाम्भाणी साहित्य की दीर्घ परंपरा और बिश्नोई पंथ द्वारा पर्यावरण की रक्षा हेतु दिए बलिदान को याद किया । डॉ रामस्वरूप बिश्नोई जोधपुर ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा सत्र का सफल संयोजन मुम्बई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की आचार्य प्रो बिनीता सहाय ने किया । वेबिनार में  विश्व के अनेक देशों सहित भारत भर के 100 से अधिक विश्वविद्यालय के विद्वानों शोधार्थियों छात्रों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया ।

डॉ मनमोहन लटियाल

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